जमीन रजिस्ट्री के नए नियम लागू, फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक Land Registry Documents

Land Registry Documents: भारत में संपत्ति की खरीद-बिक्री लंबे समय से जटिल और जोखिम भरी मानी जाती रही है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए ठगी, एक ही जमीन की कई बार बिक्री और अधूरी जांच के कारण विवाद जैसी समस्याओं ने आम लोगों को आर्थिक और कानूनी परेशानी में डाला है। इन चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने भूमि पंजीकरण प्रणाली में व्यापक सुधार लागू किए हैं। वर्ष 2026 में लागू किए गए नए नियमों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और धोखाधड़ी पर सख्त नियंत्रण स्थापित करना है।

Land Registry Documents

देशभर की अदालतों में भूमि विवादों से जुड़े लाखों मामले वर्षों से लंबित हैं। इनका प्रमुख कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और दस्तावेज सत्यापन में खामियां रही हैं। कई मामलों में खरीदार को यह जानकारी नहीं होती कि संपत्ति पर पहले से कोई मुकदमा या बकाया देनदारी मौजूद है। नई व्यवस्था का लक्ष्य इसी कमी को दूर करना और भूमि लेन-देन को कानूनी रूप से सुरक्षित बनाना है।

पैन कार्ड अनिवार्य, हर लेन-देन का होगा रिकॉर्ड

नए नियमों के तहत जमीन की रजिस्ट्री के समय खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए पैन कार्ड प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रावधान आयकर निगरानी को मजबूत करेगा और संपत्ति लेन-देन में काले धन के इस्तेमाल पर अंकुश लगाएगा। प्रत्येक सौदे का वित्तीय रिकॉर्ड दर्ज होने से भविष्य में किसी भी प्रकार की जांच आसान होगी और संपत्ति बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।

फोटो और पहचान सत्यापन से फर्जीवाड़े पर रोक

रजिस्ट्री दस्तावेजों में अब दोनों पक्षों की हालिया पासपोर्ट साइज फोटो संलग्न करना जरूरी होगा। इसके साथ पहचान प्रमाण के रूप में आधार को भी अनिवार्य किया गया है। आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वास्तविक व्यक्ति ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर रहा है। उंगलियों के निशान और अन्य डिजिटल पहचान माध्यमों के जरिए जालसाजी की संभावनाएं काफी हद तक समाप्त हो जाएंगी।

खसरा-खतौनी और पुराने रिकॉर्ड का डिजिटल सत्यापन

भूमि से जुड़े पारंपरिक दस्तावेज जैसे खसरा और खतौनी का सत्यापन अब डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। रिकॉर्ड को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़कर संपत्ति का पूरा इतिहास कुछ ही मिनटों में देखा जा सकेगा। यदि किसी जमीन पर पहले से विवाद, गिरवी स्थिति या कानूनी अड़चन मौजूद है तो वह तुरंत सामने आ जाएगी। इससे खरीदार को सौदा अंतिम करने से पहले पूरी जानकारी मिल सकेगी और भविष्य के विवादों से बचाव होगा।

बकाया कर और देनदारी चुकाने के बाद ही होगी रजिस्ट्री

नई व्यवस्था में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संपत्ति पर नगर निगम कर, बिजली बिल या अन्य सरकारी बकाया है तो पहले उसका निपटान करना अनिवार्य होगा। संबंधित रसीदें प्रस्तुत किए बिना पंजीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं की जाएगी। यह कदम नए खरीदार को पिछले मालिक की देनदारियों से बचाने के लिए उठाया गया है, जिससे भविष्य में किसी कानूनी या वित्तीय परेशानी का सामना न करना पड़े।

डिजिटल इंडिया के साथ ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रक्रिया को बढ़ावा

भूमि पंजीकरण प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में काम तेज किया गया है। कई राज्यों में अब आवेदन, दस्तावेज अपलोड और स्टांप ड्यूटी भुगतान ऑनलाइन संभव हो गया है। यह पहल Digital India अभियान के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को पारदर्शी और सुलभ बनाना है। ऑनलाइन प्रणाली से दलालों की भूमिका घटेगी और आम नागरिक को समय और धन दोनों की बचत होगी।

गिरवी और बैंक लोन की स्थिति भी होगी स्पष्ट

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी भी उपलब्ध होगी कि संबंधित संपत्ति पर किसी बैंक का ऋण बकाया है या नहीं। यदि जमीन गिरवी रखी गई है तो उसकी जानकारी पहले से मिल सकेगी। इससे खरीदार को जोखिम का आकलन करने में आसानी होगी और वह सुरक्षित निर्णय ले सकेगा। पुराने और नए रिकॉर्ड को एकीकृत कर केंद्रीकृत डाटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिससे पूरे देश में भूमि से संबंधित जानकारी एक ही प्रणाली में उपलब्ध होगी।

राज्यवार नियमों में हो सकता है अंतर

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि भूमि विषय संविधान के अनुसार राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए अलग-अलग राज्यों में क्रियान्वयन के तरीके में कुछ भिन्नता हो सकती है। संपत्ति खरीदने या बेचने से पहले संबंधित राज्य की आधिकारिक वेबसाइट पर नवीनतम दिशा-निर्देशों की जांच करना जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर कानूनी विशेषज्ञ से परामर्श लेना भी सुरक्षित कदम माना जाता है।

पारदर्शी और सुरक्षित भूमि बाजार की ओर कदम

सरकार द्वारा लागू किए गए ये नए नियम आम नागरिकों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से बनाए गए हैं। डिजिटल सत्यापन, अनिवार्य पहचान दस्तावेज और वित्तीय पारदर्शिता जैसे उपाय भूमि बाजार में फैले भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी को नियंत्रित करने में सहायक साबित हो सकते हैं। जब पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित होगी, तब आम लोगों का भरोसा व्यवस्था पर और अधिक मजबूत होगा।

इन सुधारों को संपत्ति लेन-देन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जो भविष्य में विवादों को कम करने और सुरक्षित निवेश माहौल तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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